भीमा-कोरेगांव केस: जनवरी में क्यों भड़की थी हिंसा, जानें वजह

August 29, 2018 देब्यान रॉय महाराष्ट्र के पुणे स्थित भीमा-कोरेगांव में इस साल की शुरुआत में भड़की हिंसा के मामले में पुणे पुलिस ने कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर 5 कथित नक्सल समर्थकों को गिरफ्तार किया है. कार्यकर्ताओं की तलाश में दिल्ली, फरीदाबाद, गोवा, मुंबई, रांची और हैदराबाद में अलग-अलग जगह छापे मारे गए.  गिरफ्तार किए गए लोगों में माओवादी विचारधारा के पी. वरवर राव, सुधा … Continue reading भीमा-कोरेगांव केस: जनवरी में क्यों भड़की थी हिंसा, जानें वजह

कोरेगांव-भीमा: क्या दलितों ने पेशवा को उखाड़ने के लिए की थी वो लड़ाई?

भीमा कोरेगांव में दलितों पर हुए कथित हमले के बाद महाराष्ट्र के कई इलाकों में विरोध-प्रदर्शन किए गये. दलित समुदाय भीमा कोरेगांव में हर साल बड़ी संख्या में जुटकर उन दलितों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने 1817 में पेशवा की सेना के ख़िलाफ़ लड़ते हुए अपने प्राण गंवाये थे. ऐसा माना जाता है कि ब्रिटिश सेना में शामिल दलितों (महार) ने मराठों को नहीं बल्कि … Continue reading कोरेगांव-भीमा: क्या दलितों ने पेशवा को उखाड़ने के लिए की थी वो लड़ाई?

भीमा कोरेगांव की असली कहानी, क्या युद्ध का कारण थे ब्राह्मण?

03 जनवरी 2018 महाराष्ट्र में दलितों और मराठा समुदाय के बीच हुई हिंसक झड़प की आग पूरे महाराष्ट्र में फैल गई. आज दलित संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है. इस विवाद के बीच aajtak.in आपको बता रहा है भीमा कोरेगांव की 200 साल पुरानी वो असली कहानी, जब 800 महारों ने 28 हज़ार मराठों को हराया था. 2 / 8 बात 1818 की है. तब … Continue reading भीमा कोरेगांव की असली कहानी, क्या युद्ध का कारण थे ब्राह्मण?

भीमा-कोरेगांव युद्ध को याद करने वाले किस आधार पर ‘देशद्रोही’ सिद्ध किए जा रहे हैं?

जो लोग भीमा-कोरेगांव युद्ध की याद में आयोजित समारोह के आयोजकों को राष्ट्रद्रोही सिद्ध कर रहे हैं वो यह क्यों छुपा ले जाते हैं कि न जाने कितनी बार मराठों ने भी अंग्रेज़ों के साथ मिलकर अन्य राज्यों के ख़िलाफ़ लड़ाइयां लड़ी हैं. भीमा-कोरेगांव में एक जनवरी को हुई हिंसा के विरोध में ठाणे में दलित संगठनों ने प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई) इतिहास के मुद्दे … Continue reading भीमा-कोरेगांव युद्ध को याद करने वाले किस आधार पर ‘देशद्रोही’ सिद्ध किए जा रहे हैं?

महिषासुर शहादत दिवस- दलितों के साथ भद्दा मजाक दलित विमर्श के नाम पर

महिषासुर शहादत दिवस की बात करने से पहले आज आप को इतिहास की एक घटना सुनाता हूँ।वैसे तो यह बात ncert की इतिहास की किताबों में भी दर्ज है मगर मेरे एक दोस्त ने मुझसे इसका ज़िक्र यहाँ करने के लिए कहा है। आज़ादी से काफी पहले की बात है। मैसूर के पास एक रियासत थी त्रावनकोर स्टेट, यहाँ दो जातियां रहती थीं, नायर और नादार। … Continue reading महिषासुर शहादत दिवस- दलितों के साथ भद्दा मजाक दलित विमर्श के नाम पर

आखिर क्या है महिषासुर शहादत दिवस?

आयोजकों का तर्क यह है कि महिषासुर मिथक का संबंध बहुजनों यानी दलित-आदिवासी-ओबीसी समुदाय से रहा है. इसके आयोजक और समर्थक अपनी अस्मिता को महिषासुर से जोड़ते हैं. 26 फरवरी 2016, दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सबसे पहले 25 अक्टूबर 2011 को महिषासुर शहादत दिवस मनाया गया था. इसके आयोजन में मुख्य तौर पर ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टुडेंट्स फोरम (एआईबीएसफ) से जुड़े छात्र … Continue reading आखिर क्या है महिषासुर शहादत दिवस?

आलेख : मिथ्या प्रचार के सिवा कुछ नहीं महिषासुर का महिमामंडन – अभिनव प्रकाश सिंह

स्मृति ईरानी द्वारा जेएनयू में 2011 से मनाए जा रहे महिषासुर दिवस और इस दौरान देवी दुर्गा को कहे गए अपशब्दों का जिक्र करने से संसद में उबाल है। महिषासुर दिवस को दुर्गा पूजा की पुनर्व्याख्या के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके अनुसार महिषासुर पूर्वी भारत के ‘मूल निवासी” समुदायों के शासक थे जिन्हें हराने में आर्य हमलावर असफल रहे थे। तो … Continue reading आलेख : मिथ्या प्रचार के सिवा कुछ नहीं महिषासुर का महिमामंडन – अभिनव प्रकाश सिंह

असुर महिषासुर के नाम पर है ‘मैसूर’ शहर का नाम, नवरात्रि में कुछ लोग मनाते हैं यहां शोक

मैसूर। आदिशक्ति का पर्व नवरात्रि का शुभारंभ आज से हो चुका है। अगले 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। सबको पता है कि मां दुर्गा ने इन दिनों असुर महिषासुर का वध किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में ऐसी भी जगह है, जहां महिषासुर को दैत्य नहीं बल्कि भगवान की तरह पूजा जाता … Continue reading असुर महिषासुर के नाम पर है ‘मैसूर’ शहर का नाम, नवरात्रि में कुछ लोग मनाते हैं यहां शोक

महिषासुर के नाम पर विचारधारा की जंग?

राजीव रंजन प्रसाद धीमा जहर कैसे फैलाया जाता है और मिथक कथाओं के माध्यम से सर्वदा विद्यमान जातिगत खाइयों को किस तरह चौड़ा किया जा सकता है इसका उदाहरण है इन दिनों महिषासुर पर चलाई जा रही कुछ चर्चाएं। बस्तर में सिपाहियों की शहादत पर दारू छलका कर जश्न मनाने वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में कुछ वर्षों से ‘महिषासुर डे’ मनाये जाने के नाम … Continue reading महिषासुर के नाम पर विचारधारा की जंग?

दुर्गा, महिषासुर व जाति की राजनीति

 MARCH 7, 2016 हम सबको यह पता है कि मैसूर नगर का नाम महिषासुर पर रखा गया है। एक मित्र ने मेरा ध्यान तैयब मेहता की ‘काली’ श्रंखला की पेंटिंग्स में से एक की ओर आकर्षित किया, जिसमें देवी को महिषासुर के आलिंगन में दिखाया गया है। यह पेंटिंग बहुत बड़ी कीमत पर बिकी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पर हालिया हल्ले ने भारतीय पौराणिकता और उसकी … Continue reading दुर्गा, महिषासुर व जाति की राजनीति