16 साल में भी खत्म नहीं हुआ बैकलॉग

26 Sep 2018

पिछले 16 सालों से प्रदेश में जो बैकलॉग के पदों को भरने का सिलसिला शुरू हुआ था वह अभी तक खत्म नहीं हुआ है।

भोपाल, नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्यप्रदेश में 2002 से अनुसूचित जाति- जनजाति के बैकलॉग और कैरी फारवर्ड पदों को भरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो आज भी जारी है। बैकलॉग के 20 हजार 557 और नि:शक्तजनों के 3 हजार 385 पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए अब विशेष भर्ती अभियान की मियाद 30 जून 2019 तक बढ़ाई गई है। यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन पदों को भरने में कोताही नहीं बरतने के निर्देश दे चुके हैं।

मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह स्वयं इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पदोन्न्ति में आरक्षण नियम को हाई कोर्ट द्वारा रद्द करने के बाद बैकलॉग पदों को नहीं भरने का मुद्दा जोर-शोर से उठता रहा है। विधानसभा में कांग्रेस दल के उपनेता बाला बच्चन ने सवाल लगाकर पदों को जानबूझकर रिक्त रखने का आरोप लगाया था। वहीं, अनुसूचित जाति- जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संगठन (अजाक्स) भी इन पदों को जल्द भरने की मांग उठा चुका है। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में सभी विभागों के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक करके बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने में तेजी दिखाने के निर्देश दिए थे।

मुख्य सचिव ने इसकी निगरानी का जिम्मा खुद उठाया और तीन बार अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इसमें विभागों को पदों की पूर्ति के लिए राज्य लोकसेवा आयोग और प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड को मांग पत्र भेजने के लिए कहा गया था। सामान्य प्रशासन सहित कुछ विभागों ने प्रस्ताव भी भेजे पर ज्यादा भर्तियां अभी तक नहीं हो पाई हंै। इसी बीच 30 जून 2018 को विशेष भर्ती अभियान की समयसीमा समाप्त हो गई। रिक्त पदों की स्थिति को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल ने सभी विभागों को पत्र लिखकर 30 जून 2019 तक अभियान की समयसीमा बढ़ाने और कार्यवाही तेज करने के निर्देश दिए।

2005 में ओबीसी और नि:शक्तजनों के पद भी अभियान में शामिल

2005 से पहले तक विशेष भर्ती अभियान में सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति के बैकलॉग और कैरी फारवर्ड पद ही शामिल थे। 2005 में अन्य पिछड़ा वर्ग और नि:शक्तजनों के लिए आरक्षित पदों को भी जोड़ लिया। नि:शक्तजनों के लिए छह प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं।

लगातार कर रहे हैं निगरानी

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अपर सचिव केके कातिया कई बार विभागों को रिक्त पदों को भरने के लिए मांग पत्र एजेंसियों को भेजने के निर्देश दे चुके हैं। कातिया ने बताया कि कैबिनेट ने विशेष भर्ती अभियान की समयसीमा एक साल से बढ़ाने के फैसले पर मुहर लगा दी है। विभाग की ओर से भी लगातार निगरानी की जा रही है।


Reference: https://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/bhopal-backlog-has-not-been-end-yet-far-last-16-years-2588211

Image Courtesy: Same As Above

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