राज्य बीमारी सहायता निधि के नाम पर लाखों रुपए का गोलमाल

Publish: Feb, 17 2018 11:44:52 AM (IST)                                                                Balaghat, Madhya Pradesh, India

सहायक ग्रेड ३ से वसूली के लिए जारी हुआ था नोटिस,१६ माह बाद भी नहीं हो पाई राशि की वसूली

बालाघाट. राज्य बीमारी सहायता निधि के नाम पर लाखों रुपए के गोलमाल किए जाने के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इधर, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केके खोसला ने इस मामले में कार्यालय सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के सहायक ग्रेड-३ को नोटिस भी जारी किया गया था। लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। यह नोटिस ७ अक्टूबर २०१६ को जारी किया गया था। जिसमें सहायक ग्रेड-३ के वेतन से राशि वसूली किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य बीमारी सहायता निधि से बीमारी के नाम पर नागपुर के गैर प्राधिकृत निजी चिकित्सालय से उपचार कराने के मामले में गोलमाल किया गया था। जिसमें बालाघाट से अलग-अलग बीमारियों के नाम पर करीब चालीस लाख रुपए का गोलमाल किया गया। जबकि राज्य बीमारी सहायता निधि के माध्यम से उपचार के लिए कार्डियोलॉजी व काडियोथेरिपिक सर्जरी, मल्टी डिसीप्लीनरी क्रिटीकल केयर /ट्रीटमेंट में हिप / नी रिप्लेसमेंट, पथरी का उपचार / ऑपरेशन, स्पाइनल सर्जरी, ओरल माउथ कैंसर, पेट का केंसर, गर्भासय का केंसर, ब्रेस्ट केंसर, सरवाईकल केंसर, प्रोस्टेट केंसर, लंग्स केंसर, गाल का केंसर, आहार नाल में गठान की सर्जरी का उपचार शामिल नहीं किया गया था।
जांच में हुआ खुलासा
मप्र राज्य बीमारी सहायता निधि के अंतर्गत वर्ष २०१४-१५ और वर्ष २०१५-१६ में स्वीकृत प्रकरणों की सूची का अवलोकन किया गया। जिसमें स्वीकृतकर्ता अधिकारी को गुमराह कर सेंट्रल एवेन्यू क्रिटीकल केयर आईसीसीयू व सर्जिकल हॉस्पिटल नागपुर और श्योरटेक हॉस्पिटल नागपुर से मप्र शासन द्वारा दी गई सर्जरी की मान्यता के अतिरिक्त अन्य बीमारियों के नाम पर राशि का आहरण किया गया। जिसमें अलग-अलग बीमारियों के उपचार के नाम पर वित्तीय वर्ष २०१४-१५ में ८ लाख ५७ हजार रुपए और वित्तीय वर्ष ३१ लाख ५६ हजार रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई। जो कि नियम विरुद्ध थी।
वेतन से वसूली के लिए जारी किया था नोटिस
इस मामले में गोलमाल की राशि वसूली के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ केके खोसला ने ७ अक्टूबर २०१६ को सहायक ग्रेड ३ कादर रजा को नोटिस जारी किया गया था। जिसमें उल्लेख किया गया था कि योजना के नाम पर गोलमाल किए जाने का मामला मप्र सिविल सेवा आचरण नियम १९६५ के नियम ३ सामान्य के उपनियम ३ की कंडिका (एक), (दो), (तीन) के विरुद्ध होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है। इस कदाचरण के लिए मप्र सिविल सेवा नियम १९९६ के अधीन अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वहीं राशि ४० लाख १३ हजार रुपए की राशि वेतन से वसूली जाए। हालांकि, इस मामले में अभी तक राशि की वसूली नहीं हो पाई है।
इनका कहना है
इस मामले में क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। प्रकरण के बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय से ही पूरी जानकारी मिल सकती है।
-डॉ. एके जैन, सीएस, जिला चिकित्सालय बालाघाट
इस प्रकरण की मुझे जानकारी नहीं है। मामले के बारे में जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-शिवगोविंद मरकाम, एडीएम, बालाघाट


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