मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता में नहीं हो रहा सुधार

Jul, 17 2018 03:22:00 PM (IST)                                                                       Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए बनाई गई महत्वाकाक्षी योजना मिड-डे मील में ही उन्हे शुद्ध खाना भी नहीं मिल रहा।

टीकमगढ़.स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए बनाई गई महत्वाकाक्षी योजना मिड-डे मील में ही उन्हे शुद्ध खाना भी नहीं मिल रहा। ऐसे में स्पष्ट है कि यहा आने वाले छात्रों का स्वास्थ्य खतरे में है। हम खुलासा कर रहे है जिले के नारगुडा, कारी, अगोर की टपरियन, बजरूआ, वार्ड नम्बर एक कारी, कंचनपुरा, हनुमानसागर, कछियाना, बौरी, सुजारा की प्राथमिक पाठशाला का।
स्कूल आने वाले बच्चों को नियमित रूप से मिड-डे मील आहार दिया जाता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर उठने वाले सवालों में कोई कमी नहीं आई है। भोजन में पाई जाने वाली कमियों को दूर करने का प्रयास तो दूर इसके निर्देशों का पालन करने में भी लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में मिड-डे मील के आहार-चार्ट के अनुसार भोजन देना तो दूर उसके बारे में बच्चों को जानकारी भी दे रहे है। संस्थाएं और एजेंसियां भी लापरवाह है। इन एजेंसियों के मिड-डे मील संचालक के साथ-साथ स्कूल के प्रभारी शिक्षक को भोजन की देखरेख और उसके स्वाद की परख की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लेकिन यह प्रक्रिया प्रत्येक क्षेत्र में कारगर नहीं हो सकी है।
पौष्टिक आहार मुहैया कराने में नहीं मिल रही सफ लता
स्कूल के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भले ही मिड-डे मील की शुरुआत की गई हो, लेकिन मौजूदा समय में इसकी हालत चिंतनीय है। भोजन के चार्ट का कई स्कूलों से गायब होना ही इसकी हकीकत बयां करता है। नारगुडा, कछियाना, हनुमानसागर, बजरूआ, वार्ड नम्बर एक कारी, कंचनपुरा, हनुमानसागर,कछियाना, बौरी, सुजारा स्कूल समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से आहार चार्ट गायब हैं। आहार में गड़बडयि़ों की घटना से यह स्पष्ट है कि इस बारे में नियमों के पालन और सुचारू व्यवस्था का स्कूलों में अभाव है।
पोषक तत्वों की कमी
मिड-डे मील आहार के माध्यम से हर हफ्ते बच्चों को अलग-अलग पोषण वाले आहार देने के नियमों के पालन में लापरवाही बरती जा रही है। इसके कारण बच्चों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है। बच्चों को अलग-अलग प्रकार के ब्यंजनों की लिस्ट के माध्यम से बच्चों में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की मात्रा को संतुलित रखना था। लेकिन इस कार्य में अब तक सफ लता नहीं मिल सकी है।

केस-1
जमीन में बैठकर खा रहे भोजन
पत्रिका की टीम ने सोमवार की दोपहर 1 बजे नारगुडा प्राथमिक शाला के स्कू ल में वितरण किए गए मध्यान्ह भोजन को देखा तो चना दाल की जगह मूंग दाल और आलू की सब्जी कम पानी ज्यादा दिखाई दे रहे थे। मॉ भवानी स्व सहायता समूह द्वारा बच्चों को स्कूल के बाहर बैठाकर भोजन दिया जा रहा था। जहां चारों ओर गंदगी फैली हुई थी। मामले को ेलेकर रसोईयों से बात की गई। तो उनका कहना था कि स्कूल में पंखा न होने के कारण बच्चें बाहर आ गए है। वहीं सहायक शिक्षक स्वरूपचंद्र जैन का कहना था कि स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक के 79 छात्र है। जिसमें 43 छात्र ही उपस्थित हुए है।
केस-2
मीनू अनुसार नहीं दिया भोजन
प्राथमिक शाला सुजारा की छात्र आनंद राजपूत, धर्मपाल अहिवाल, सौरभ लोधी ने बताया समूह संचालक द्वारा मीनू अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को आलू की सब्जी और चना की दाल दी जानी थी। लेकिन बच्चों को एक ही आलू की सब्जी दी गई। इसके साथ ही अधजली रोटी। श्री राधाकृष्ण स्व सहायता समूह के अध्यक्ष रामरति रजक ने बताया कि स्कूल में करीब 75 बच्चे दर्ज हैं। जिसमें 30 बच्चें ही उपस्थित रहे।
केस-3
कारी के स्कूलों में नहीं मिल रहा सही मध्यान्ह,कई बार की शिकायत
नगर परिषद कारी के वार्ड 1 की प्राथमिक पाठशाला, बालक प्राथमिक क न्या शाला, माध्यमिक शाला कारी, प्राथमिक शाला कंचनपुरा, प्राथमिक शाला अगोर की टपरियन में वितरण होने वाला भोजन गुणवत्ताहीन तरीके से किया जा रहा है। मध्यान्ह भोजन में सुधार के लिए कई बार वार्ड वासियों सहित छात्रों ने संबंधित अधिकारी को मौखिक और लिखित शिकायत की थी। लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इनका कहना
प्रशासन द्वारा समूह संचालक को गुणवत्तापूर्ण तरीके से छात्रों को भोजन वितरण करने के निर्देश दिए गए है। जहां-जहां मीनू अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है तो उनके लिए जांच टीम गठित की जाएगी। अगर कोई भी समूह संचालक भोजन की गुणवत्ताहीन तरीके से भोजन वितरण करते पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गुजन सेन टास्क मैनेजर मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम अधिकारी टीकमगढ़


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