पोषण आहार अपडेटप्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है। 2016 में यह आंकड़ा प्रतिदिन 74 बच्चों का था। ताजा आंकड़े…

Mar 08, 2018, 

प्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है। 2016 में यह आंकड़ा प्रतिदिन 74 बच्चों का था। ताजा आंकड़े जनवरी 2018 के हैं। यह जानकारी विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने एक प्रश्न के जवाब में दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 सितंबर 2016 को प्रदेश में कुपोषण की स्थिति जानने के लिए श्वेतपत्र तैयार करने के लिए कमेटी गठित करने की घोषणा की थी, लेकिन इस समिति ने अब तक जांच के बिंदुओं का निर्धारण तक नहीं किया। सरकार का एक ही जवाब-कार्यवाही जारी है।

दो साल में 3300 करोड़ रुपए खर्च

कुपोषण पर सरकार बीते दो सालों में ही 3300 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। यह राशि 2016-17 और 2017-18 में आईसीडीएस, पोषण आहार और अटल बिहारी वाजपेयी आरोग्य एवं पोषण योजना पर खर्च की गई। इसके बाद भी कुपोषण से होने वाली मौतों में कमी नहीं आ पा रही। दस सालों में सिर्फ कुपोषण मिटाने के लिए न्यूट्रीशियन की खरीदी पर 4800 करोड़ खर्च हुए। शेष | पेज 8 पर

आइए बचाएं जरूरतमंद बच्चों का भोजन

मप्र में बढ़ा कुपोषण; रोज 92 बच्चों की मौत; 2016 से रोज 18 मौतें ज्यादा

श्वेतपत्र समिति ने जांच के बिंदु तक निर्धारित नहीं किए

प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 तक 57 हजार बच्चों की हो गई मौत

इस तरह बढ़ी औसत मृत्यु दर

1 जनवरी 2016 से 1 जनवरी 2017- 396 दिन 5 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 28948 रही, 6 से 12 वर्ष के 462 बच्चों की मौत हुई। कुल 29,410 बच्चों की मृत्यु हुई। 396 दिन में रोजाना 74 बच्चों की मौत हुई।

अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018- 123 दिन : 0 से 1 वर्ष तक के मृतक बच्चों की संख्या 9124 थी। वहीं, 1 से 5 वर्ष के 2215 बच्चों की मौत हो गई। कुल 11339 बच्चों की मृत्यु हुई। यानी 123 दिनों में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई।

प्रदेश के इन जिलों में सबसे अधिक कम वजन वाले बच्चे

जिला कम वजन अति कम वजन

भोपाल 24852 1979

धार 65496 4729

बड़वानी 56724 3754

सतना 42406 5522

शिवपुरी 41271 3978

इंदौर 17744 1620

मुरैना 34764 2097

श्योपुर 20041 3817

रतलाम 27519 4280

स्रोत:महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट

अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 -यानी 183 दिन

1 वर्ष के 13843 बच्चों की मृत्यु हुई। वहीं 1 से 5 वर्ष के 3055 बच्चों की मौत हुई। कुल 16898 बच्चों की मृत्यु हुई। 183 दिन में प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई।

हम सिर्फ इलाज करते हैं

इस बारे में महिला बाल विकास विभाग काम करता है। जो अति कम वजन के बच्चे अस्पताल आते हैं, उनका इलाज किया जाता है।\’ रुस्तम सिंह, स्वास्थ्य मंत्री, मप्र

श्वेत पत्र क्यों जारी नहीं हुआ, इस बारे में कुछ भी जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं। जेएन कंसोटिया, प्रमुख सचिव, महिला बाल विकास


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/MP-RAT-MAT-latest-ratlam-news-040003-1230094-NOR.html

 

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