24 लाख से तैयार नल-जल योजना ठप, एक किमी दूर से पानी ला रहे लोग

बदरवास नगर से 3 किमी दूर स्थित 5 हजार से अधिक की आबादी वाली ग्राम पंचायत बारई में 24 लाख रुपए की लागत से निर्मित की गई नलजल योजना भी शोपीस बन कर रह गई है। स्थिति यह है कि गांव में लगे सभी हैंडपंप व ट्यूबवेलों ने जलस्तर नीचे जाने के कारण दम तोड़ दिया है। जिसके चलते अब ग्रामीण 1 किमी दूर से निजी ट्यूबवेलों व आदिवासी बस्ती से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे है। वहीं पीएचई के जिम्मेदार अधिकारी जलस्तर नीचे जाने की बात यह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए ये समस्या बता रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को कहना है कि नलजल योजना के तहत कराए तीन नलकूप खनन की कम गहराई होने के कारण उन खनन में पानी नहीं निकला है। इसलिए ये पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद भी ग्राम पंचायत सहित पीएचई के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पानी की टंकी बनी शोपीस : बराई ग्राम पंचायत में वर्ष 2007 में 24 लाख रुपए से स्वीकृत हुई नलजल योजना के तहत पंचायत में 70 हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनाई गई थी। साथ ही टंकी से पाइल लाइन गांव में बिछाकर नल कनेक्शन दिए गए थे। जिससे लोगों को घर-घर पानी मिल सके। लेकिन टंकी भरने के लिए पीएचई द्वारा कराए गए 7 नलकूप खनन लगातार सूखे निकलते चले गए स्थिति यह बनी कि पंचायत में 800 फीट तक गहराई के बोरों में भी पानी नहीं निकला। जिसके चलते ग्रामीण पेयजल के लिए हाल बेहाल बने हुए हैं।

पीएचई के अधिकारी बोले जल स्तर नीचे जाने के कारण बने ये हालात

7 नलकूप खनन किए लेकिन नहीं मिली राहत

ग्राम पंचायत बारई में गंभीर जल संकट बना हुआ है। पीएचई द्वारा इस संकट से उभरने के लिए एक के बाद एक यानि की 7 नलकूप खनन कराए गए। जिसमें से एक-दो खनन में ही थोड़ी बहुत पानी निकला जिससे टंकी नहीं भर पा रही है। वहीं ज्यादा गहराई होने के कारण मोटर भी थोड़ा बहुत पानी आता है। जिससे चलते गांव में आज भी भीषण संकट बना हुआ है और ग्रामीण 1 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर बने हुए हैं। वहीं ग्राम पंचायत यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है कि पीएचई द्वारा अभी तक नलजल योजना को हमारे अधीन नहीं किया है।

ग्राम पंचायत ने भी किए हाथ खड़े

24 लाख रुपए की लागत से ग्राम पंचायत में वर्ष 2007 में निर्मित हुई नलजल योजना के हाल बहला पड़े हुए हैं और ग्रामीण पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। वहीं पंचायत ने यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है कि पीएचई विभाग द्वारा अभी तक नलजल योजना को हमारे अधीन नहीं किया गया है। वहीं पीएचई का कहना है कि निर्माण कराना हमारा कार्य होता है। इसका संचालन कराना पंचायत का ही दायित्व होता है। इस प्रकार जिम्मेदार एक दूसरे पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से दूर हो रहे हैं।

पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है

हमें पीने के पानी के लिए इतना संघर्ष करना पड़ता है, जिसे हम बता भी नहीं सकते कि हमें कितनी मेहनत करनी पड़ती है। आप खुद देख लें कि घर के छोटे-छोटे बच्चे भी पानी के लिए मेहनत कर रहे है, हमारी कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। लाखन सिंह, राजपूत निवासी बारई

पानी की व्यवस्था कमजोर है

गांव में पीने के पानी की व्यवस्था बहुत कमजोर है, मैंने जब से चार्ज लिया है तब से नलजल योजना की टंकी शोपीस बनी हुई है। रामकुमार यादव, सचिव ग्राम पंचायत बराई

जलस्तर काफी गिर चुका है

क्षेत्र में अधिकतर नलजल योजना दम तोड़ चुकी हैं। जिसका मुख्य कारण क्षेत्र में गिरता हुआ जल स्तर है, बात बारई की है तो वहां का जल स्तर काफी गिर चुका है, जिस कारण ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है, हालांकि हमने अभी वहां एक बोर कराया था जिससे पानी की आपूर्ति हो रही है और हम जल्द ही हैंडपंपों को दुरुस्त करने का काम करेंगे। आरबी गर्ग, एई पीएचई कोलारस


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/latest-badarwas-news-041003-1752941.html

 

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