सौ से ज्यादा नल-जल योजनाएं बंद, अब हैण्डपंपों ने भी दम तोड़ा

विदिशा. भीषण गर्मी के साथ ही पेयजल व्यवस्था के हालात भी बिगडऩे लगे हैं। अभी से जिले की सौ से ज्यादा नल-जल योजनाओं और एक हजार से ज्यादा हेण्डपम्पों ने दम तोड़ दिया है। भू-जल स्तर पिछले साल की तुलना में एक मीटर नीचे जा पहुंचा है। ऐसे में कई ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए भारी जद्दोजहद हो रही है। सुबह से देर रात तक लोग पानी के इंतजाम में लगे हुए हैं।

 

जिले की ३०९ नलजल योजनाओं में से विभाग की नजर में २४१ नल जल योजनाएं संचालित हैं और ६८ योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। लेकिन प्रशासन का यह आंकड़ा सौ फीसदी सही नहीं है। दरअसल इल २४१ योजनाओं में से भी करीब ५० योजनाएं ऐसी हैं, जहां आधी-अधूरी सप्लाई हो रही है, या कुछ बस्तियों को ही पानी मिल पा रहा है।

जो ६८ नल-जल योजनाएं पूरी तरह बंद हैं, उनमें से ८ में अपर्याप्त जल स्त्रोत, १४ में विद्युत समस्या, १० योजनाओं में मोटर पम्प खराब पड़े हैं, २५ योजनाएं पाइप लाइन की खराबी के कारण बंद हैं, जबकि ५ योजनाओं का पूरा सिस्टम ही खराब हो चुका है और वहां नए सिरे से काम होगा। नल जल योजनाओं की दृष्टि से सबसे ज्यादा खराब हालत विदिशा और गंजबासौदा ब्लॉक की है।

अहमदपुर कस्बे की नलजल योजना भी लम्बे समय से पूरी तरह ठप पड़ी है। यहां हाल ही में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय ने योजना को फिर से शुरू करने के लिए नलकूप खनन कराया, लेकिन ४०० फीट तक खुदाई के बाद भी सफलता नहीं मिली। इतनी गहराई पर भी पानी नहीं निकलने से पेयजल समस्या हल नहीं हो सकी है।

ठेकेदारों ने नहीं ली रुचि तो पंचायतों को सौंपा

जिले की सात खराब नल जल योजनाओं का काम कराने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग ने निविदाएं मंगाईं थीं, लेकिन किसी भी ठेकेदार ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में मजबूर होकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय को इन सातों योजनाओं का काम पंचायतों को सौंपना पड़ा।

शासन को प्रस्ताव भेजा

गर्मियों में पेयजल संकट से निपटने और सूखे की कार्ययोजना के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभग ने जिले की संभावित २८८ बसाहतों में पेयजल व्यवस्था के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में नलकूप खनन, पाइप विस्तार, सिंगल फेस मोटर लगाने आदि कार्यों के लिए १६०६.७० लाख रूपए का प्रस्ताव भेजा गया है।

जल स्तर गिरने से सैंकड़ों हैण्डपंप बंद

यूं तो प्रशासन जिले में कुल १०७४२ में से १०२१० हैण्डपम्पों को चालू बता रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीण अंचल में करीब १ हजार हैण्डपम्प विभिन्न कारणों से पूरी तरह बंद हैं, या बंद होने के समान हैं। यहां कुछ में तो बिल्कुल पानी नहीं हैं, जबकि कुछ रह-रहकर एक-दो बाल्टी पानी देकर बंद हो जाते हैं। अधिकांश हेण्डपम्प जल स्तर नीचे गिरने से बंद हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण परेशान हैं।

ये बोले जिम्मेदार

जिले में ३०९में से २४१ नलजल योजनाएं चालू हैं। जबकि १०७४२ में से १०२१० हैण्डपम्प भी चालू हैं। फिरभी समस्यामूलक बस्तियों में तत्परता से काम किया जा रहा है। जहां दिक्कत है, वहां जल्दी ही पानी के वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।

गौरव सिंघई, कार्यपालन यंत्री, लोकस्वास्थ्य यांत्रिकीय विदिशा


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