सीएम हेल्पलाइन बनी गुमराह करने का माध्यम

Jun, 14 2018 06:26:59 PM (IST)                                                                                     Neemuch, Madhya Pradesh, India

कई मामले बिना जांच के ही कर दिए जाते हैं समाप्त
बिना बयान लिए राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति की शिकायत को भी किया समाप्त

नीमच. सीएम हेल्पलाइन (१८१) से लोगों को उम्मीद जगी थी। लोग स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर १८१ के भरोसे थे। समय के साथ १८१ पर भी खानापूर्ति होने लगी। गंभीर मामलों में भी बिना शिकायतकर्ता के बयान लिए उनके समाप्त किया जाने लगा। ऐेसे एक दो नहीं कई मामले प्रकाश में आए हैं। ग्राम अरनिया कुमार में जमीन हेराफेरी के प्रकरण तक को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। नपा के कांग्रेस पार्षद ने भी सीएम हल्पलाइन में ३-४ शिकायतें दर्ज कराई। उनका भी वहीं हर्ष हुआ जो दूसरे गंभीर मामलों में देखने में आया था।
गंभीर प्रकरणों तक की नहीं होती सुनवाई
सीएम हेल्पलाइन प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है। ऐसे कईमामले सामने आ चुके हैं जिनकी 18 1 पर शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। ऐसा ही एक मामला ग्राम अरनिया कुमार का सामने आया है। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के संभाग उपाध्यक्ष, नपा के पूर्व पार्षद और अभिभाषक अमित शर्मा ने शासकीय भूमि भील के नाम चढ़ाकर बेचने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की थी। शिकायत के संबंध में राजस्व विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोई जांच नहीं की गई। यहां तक कि शिकायतकर्ता के बयान तक नहीं लिए गए और प्रकरण को समाप्त कर दिया गया। शिकायतकर्ता शर्मा ने बताया कि उनके द्वारा 2 अप्रैल 2018 को एक शिकायत 18 1 पर की थी। इसमें उन्होंने यह बताया था कि पूर्व पटवारी सुनील अग्रवाल द्वारा बिना अधिकार के मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 115, 116 के तहत कार्यवाही करते हुए ग्राम अरनिया कुमार की भूमियों में बड़ा हेरफेर किया था। इसकी शिकायत 12 फरवरी 2018 को कलेक्टर एवं उज्जैन कमिश्नर (उज्जैन संभाग) को भी की थी। इस पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर सीएम हेल्पलाइन इसकी शिकायत की थी। कई दिनों तक शिकायत १८१ पर चली। अचानक शिकायतकर्ता के बयान लिए बिना ही शिकायत रफादफा कर दी गई। शिकायतकर्ता शर्मा को यह बताया गया कि जिस भूमि के संबंध में शिकायत की गई थी इस संबंध में अपर कलेक्टर के यहां पुनर्विलोकन प्रकरण प्रचलित है। जब इस संबंध में शिकायतकर्ता ने पता किया तो पता चला कि जिस भूमि के संबंध में पुनर्विलोकन प्रकरण प्रचलित है वह भूमि वह नहीं है जिसकी शिकायत की गई थी। 18 1 पर गलत जानकारी प्रदान कर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत को बंद किया जा रहा है।
यह मामले भी बिना जांच के हुए रफादफा
नगरपालिका परिषद में कांग्रेस पार्षद योगेश प्रजापति ने भी सीएम हेल्पलाइन १८१ पर रिलायंस कम्पनी द्वारा शहर में अवैध खुदाई की शिकायत एक साल से ‘फोर्थ लेवलÓ तक चली। एक माह पहले अचानक १८१ से हटा दी गई। कारण पता नहीं चला। इसी प्रकार शास्त्री नगर स्थित पार्क में घटिया स्तर की टाईल्स निर्माण की शिकायत भी की थी। इसपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और इसे भी कुछ समय बाद हटा दिया गया। भाजपा पार्षद राजेश अजमेरा द्वारा खेत क्रमांक 41 व 47 में नपा की जमीन बेचने की गंभीर शिकायत की थी। इस प्रकरण में बताया था कि जमीन नपा की है बावजूद इसके भाजपा पार्षद उसे अवैधानिक रूप से बेच रहे हैं। इसके बाद भी अतिगंभीर प्रकरण को रफादफा कर दिया गया। एक अन्य मामले में जिसमें इंदिरा नगर में बिना निर्माण अनुमति के 4 मंजिला मकान बना दिया गया। इसे भी १८१ से कुछ ही समय में हटा दिया गया। इंदिरा नगर में ही सरकारी जमीन पर दुकान बनाने की शिकायत को भी सीएम हेल्पलाइन पर गंभीरता से नहीं लिया गया। राजीव नगर में 6 माह से ‘पार्थ वेÓ के घटिया निर्माण को ठीक करवाने की शिकायत १८१ पर की थी। उसे भी नजरअंदाज कर दिया गया। मेहनोत नगर में चार मंजिला भवन अवैधानिक रूप से बनाया गया। इसकी शिकायत की गई। १८१ पर तो कार्रवाई नहीं हुई नरगपालिका ने संबंधित मकान निर्माणकर्ता को इतना समय दे दिया कि वे कोर्टकी शरण में चले गए।
जल्द प्रमुख सचिव को करूंगा शिकायत
इस संबंध में जल्द प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन को शिकायत की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बिना मेरे कथन लिए शिकायत समाप्त की गई है। यह एक गंभीर मामला है। सीएम हेल्पलाइन ऐसे अधिकारियों की लापरवाही ही वजह से ही अनुपयोगी साबित हो रही है।
– अमित शर्मा, शिकायतकर्ता नीमच
शिकायतकर्ता को संतुष्ट करना आवश्यक
सीएम हेल्पलाइन पर की शिकायत को तब तक समाप्त नहीं किया जा सकता जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हो जाए। लेकिन इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। अधिकारी एक-दूसरे को बचाने में लगे हुए हैं। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। उज्जैन बड़े प्रशासनिक अधिकारी तक इसमें शामिल हैं।
– योगेश प्रजापति, कांगे्रस पार्षद नपा नीमच


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *