नल-जल योजना बंद, तीन किमी दूर से पानी ला रहे सिंगपुरी गांव के रहवासी

नगर से 12 किमी दूर स्थित सिंगपुरी गांव के बाशिंदे बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन पानी की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। गांव में पानी की व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण महिला पुरुष दो से तीन किमी दूर खेत में लगे निजी ट्यूबवेल से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार पीएचई विभाग द्वारा ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराए जाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

सिंगपुरी गांव में पानी की समस्या सालों पुरानी है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा ठोस प्रयास नहीं किए गए। बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि ग्रामीण कई बार तहसीलदार से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर गांव की पेयजल समस्या से निजात दिलाए जाने की मांग कर चुके हैं। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों से भी मांग की जा चुकी है, लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की जायज मांग को तवज्जो नहीं दी। सरकार गांवों में पानी की समस्या से निपटने के लिए न-केवल करोड़ों रुपए खर्च कर रही है बल्कि कार्ययोजना बनाकर पानी उपलब्ध कराए जाने का ढिंढोरा भी पीटा जा रहा है, लेकिन आज भी गांवों में पानी उपलब्ध नहीं है। पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों में भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि मात्र सिंगपुरी गांव में ही पानी की समस्या विकराल रूप धारण किए हो। तहसील के 100 से अधिक गांवों में जल संकट बना हुआ है। अभी गर्मी का मौसम शुरू हुआ है और ग्रामीण पानी के लिए जद्दोजहद करने लगे हैं। आने वाले दिनों में जल संकट भयावह रूप ले सकता है।

यह कैसी नल-जल योजना : सिंगपुरी गांव के ग्रामीणों की मानें तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा 10 वर्ष पूर्व गांव में नल-जल योजना प्रारंभ की गई थी। तब ग्रामीणों ने खुशी का इजहार किया था कि अब गांव के बाशिंदों को शुद्ध व साफ पानी मिलेगा, लेकिन यह खुशी चंद दिनों में ही काफूर हो गई। चार दिन के बाद ही नल जल योजना ठप हो गई। गांव के हीरालाल, महेंद्र आदि ने बताया कि करीब 3 साल पूर्व गांव में पीएचई विभाग द्वारा पाइप लाइन डाली थी, लेकिन वह भी अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पीएचई विभाग ग्रामीणों को साफ पानी मुहैया कराने में मनमानी बरत रहा है।

महिलाएं ला रहीं दूर-दूर से पानी : ग्राम की महिलाएं सुबह करीब 4 बजे उठकर पानी के लिए जद्दोजहद करने में लग जाती हैं। सिर पर बर्तन रखे महिलाएं 3 से 5 किमी दूर जाकर खेतों में स्थित निजी जल स्रोतों से पानी भर कर ला रही हैं। इतना ही नहीं ग्राम के पुरुष बैलगाड़ी में टंकी बांधकर रोज दूरस्थ स्थानों से पानी ला रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई किमी दूर से पानी लाने में सुबह व शाम का समय जोड़ा जाए तो 6 से 8 घंटे का समय पानी लाने में ही जाया हो जाता है।

गांव के सभी हैंडपंपों से पानी निकलना हुआ बंद, पीएचई विभाग भी नहीं ले रहा सुध

ग्रामीण तहसीलदार से लेकर मुख्यमंत्री तक को समस्या से निजात दिलाने लिख चुके हैं पत्र

शोपीस बनी नल-जल योजना के तहत बनी पानी की टंकी 


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/MP-BPL-HMU-MAT-latest-silwani-news-055004-1396818-NOR.html

Image Courtesy: Same As Above

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