नर्मदा घाटी के लाखों पेड़ों की जल समाधि की तैयारी

 

नर्मदा कछार में, मूलत: किनारे के गांवों में हो रहा पौधारोपण का कार्यक्रम मात्र अंक दिखावा साबित हो रहा है। पौधे रोपने वाले क्या सही में पर्यावरण की रक्षा के पक्ष में हैं?

अगर होते तो नर्मदा किनारे के मात्र एक सरदार सरोवर बांध की डूब में 13,385 हेक्टेयर जंगल जिसमें हर हेक्टेयर में कम से कम 1600 से 2000 पेड़ थे, नहीं डुबाते और अब निमाड के 192 गाँव और धरमपुरी नगर के कुछ दस लाख पेड़ डुबाने की तैयारी नहीं करते। ये जानकारी नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से दी गई।

मेधा पाटकर, राहुल यादव, कमला यादव एवं साथियों ने बताया कि म. प्र. सरकार ने डूब में आने वाले पेड़ों के बारे में बार-बार गलत और भ्रामक जानकारी केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के पर्यावरण उपदल तथा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को दी गई।

ज्ञातव्य है कि सरदार सरोवर बांध के संबंध में वन तथा जमीन डुबाने के पहले दी मंजूरी की शर्त में तीन गुना जंगल लगाना का निेर्देश था। लेकिन यह काम म.प्र. में नहीं के बराबर हुआ। लेकिन रिपोर्ट में तो शत प्रतिशत कार्यपूर्ति बताई गई। लेकिन विडम्बना है कि कभी न तो पर्यावरण उपदल या मंत्रालय ने जमीनी हकीकत को जाँचा हो।

सवाल यह भी है कि क्या वैकल्पिक वनीकरण से सतपुड़ा व विन्ध्य के घने साग के विविधता से भरे जंगलों का पुनर्निर्माण या हानिपूर्ति हो सकेगी ?

निमाड़ के मैदानी क्षेत्र के पेड़ों की तो कभी कोई दखल शासन या नियंत्रण की जिम्मेदारी लेने वाले किसी शासकीय संस्था ने नहीं ली। सरदार सरोवर का ही डूब क्षेत्र देखें तो कुछ दस लाख घने, बड़़े तने के पेड़ डूब में आ रहे हैं।

जैसा कि सर्वेक्षण बताता है, 38 गांवों में 86,300 बड़े पेड़ हैं, जो 100 या अधिक साल पुराने हैं। ऐसे पूरे क्षेत्र में कितने पेड़़ होंगे? इन्हें डुबाने से हो रहा विनाष की न केवल हरे आच्छादन का, बल्कि नदी कछार का, हवा/जलवायु का (पेड़ सड़ने से) ग्रीन हाउस निर्मिति से क्या कभी भरपाई हो पाएगी?

शासन 6 करोड़ पौधे लगाने से किस लाभ का दावा करता है, यह पता नहीं चला है। नर्मदा के पानी का प्रदूषण सबसे अधिक बांधों से नदी को रोकने से हो रहा है, हुआ है। फल और फूल के पौधे भूक्षरण भी नहीं रोक सकेंगे। उन्होंने सलाह दी थी, स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने की। फिर भी मध्य प्रदेश शासन के दिखावे के कृत्य-कार्य जारी हैं। तो क्या इन्हें अब पर्यावरण सुरक्षा का भी पुरस्कार दिया जाए?

बड़वानी, धार, खरगोन व अलीराजपुर में नदी पात्र व कछार में रेत खनन भरपूर जारी है। यह हाईकोर्ट व एनजीटी के आदेशों के विपरीत है। इसी से तो सबसे अधिक गाद भरना और प्रदूषण हो रहा है, जो कि राजनेता व अन्य अधिकारियों के गठजोड़ से हो रहा है।

नर्मदा सेवा यात्रा में लाखों पेड़ लगाये उनकी स्थिति क्या है, जो बडवानी जिले 25 लाख पेड़ लगाने की बात कर रहे है, उसकी देख-रेख की जिम्मेदारी किसकी होगी, वह कोई भी कार्ययोजना सरकार के पास नहीं है, हर बार वृक्षरोपण किया जाता है, परन्तु उसका भविष्य में क्या होने वाला है, उसकी कोई भी बात नहीं करता है।


Reference: http://www.deshbandhu.co.in/vichar/preparation-of-cutting-millions-of-trees-of-narmada-valley-57877-2

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *