नंदी शाला योजना में लाखों का घालमेल

रमाशंकर नगरिया -!- सेंवढ़ा
सरकार की नंदी शाला योजना में पशु चिकित्सा विभाग ने लाखों का घालमेल कर दिया है। हितग्राहियों से अनुदान की पूरी राशि लेकर कम कीमत पर कमजोर पशु थमा दिए। इससे पशु पालकों में आक्रोश है। खासबात यह है कि विभाग ने पशु न लेने की इ\’छा रखने वाले हितग्राहियों से अनुदान की राशि वापस मांग रहा है।
क्या है योजना
पशु चिकित्सा विभाग में नंदी शाला योजना लागू है। योजना के तहत मादा पशु पालकों को नर पशु खरीदने के लिए शासन अनुदान दे रहा है। योजना का उद्देश्य पशुओं की नस्ल सुधारना है। मसलन अगर कोई किसान गायें पालता है तो उसे अ\’छी नस्ल का बैल खरीदने के लिए शासन अनुदान दे रहा है ताकि पशु की नस्ल में सुधार है।
कैसे हुआ घालमेल
वर्ष 2012-13 के लिए जिले के 72 हितग्राहियों को योजना के तहत चयनित किया गया। हर हितग्राही के खाते में शासन ने नवंबर 2012 को अनुदान की राशि 14 हजार रुपए भेज दी। मार्च के अंत में विभाग से हितग्राहियों को पशु उपलब्ध कराए। इसी के साथ विभाग के जमीनी अमले ने हितग्राहियों से अनुदान की राशि लाने के लिए दबाव बनाया। विभागीय कर्मचारियों ने हितग्राहियों ले अनुदान की पूरी राशि नगद ले ली। बदले में जो पशु हितग्राहियों को दिए गए। वह बेहद कमजोर व हल्की नस्ल के थे। जिनकी बाजार में कीमत तीन से चार हजार रुपए आंकी गई। यानि विभाग ने एक हितग्राही पर सीधा 10 हजार का घालमेल कर दिया। हितग्राहियों ने जब इसकी शिकायत की तो पशु न लेने पर हितग्राहियों ने अनुदान राशि वापस मांगी गई। जिस पर तमाम हितग्राहियों ने राशि वापस कर दी।


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/sheopur/news/MP-OTH-c-303-43209-NOR.html

 

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