दो साल से विदेश यात्रा पर नहीं गया जिले का एक भी किसान, योजना है मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा

Oct, 24 2017 01:30:28 PM (IST) Shahdol

कागजों में सिमटी मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा

जागरूकता व प्रचार प्रसार के अभाव में अछूते हैं जिले के किसान

शहडोल- आदिवासी बाहुल्य जिले में खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके लिये शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन व किसानों को उनका लाभ मिले इसके प्रयास भी किये जा रहे हैं, योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार व योजना को लेकर किसानों में जागरुकता लाने में विभाग असमर्थ साबित हो रहा है। जिसके ही परिणाम हैं कि योजनाएं तो बहुत हैं लेकिन उनके लाभ से जिले के किसान आज भी वंचित हैं।

सरकार ने वर्ष 2013-14 में मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा योजना प्रारंभ की थी। जिसमें किसानों को सरकार तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन एवं प्रायोगिक जानकारी मुहैया कराने के उद्देश्य से विदेश भ्रमण करा रही थी। दु:खद पहलू यह है कि योजना का न तो व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ और न ही किसानों ने इसमें विशेष दिलचस्पी दिखाई। जिसका परिणाम यह हुआ कि योजना कागजों तक सिमट कर रह गई। सोचनीय पहलू यह है कि इस योजना के क्रियान्वयन में दो वर्ष से ब्रेक लगा हुआ है और इसके लिये किसानों से आवेदन भी नहीं लिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा योजना का संचालन वर्ष 2013-14 से किया जा रहा है। योजना का क्रियान्वयन लगभग पांच वर्ष से हो रहा है जिसके लिये प्रदेश के अन्य जिलो की बात की जाये तो किसान विशेष रुचि ले रहे हैं लेकिन जिले में हालात प्रदेश के अन्य जिलों से अलग हैं। योजना को लेकर न तो अधिकारी कर्मचारी ध्यान दे रहे हैं और न ही किसानों का इस ओर विशेष रुख है। इन पांच वर्षों में गिने चुने किसानो ने ही योजना का लाभ पाने में रुचि ली है।

योजना के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारी कर्मचारी जितनी निष्क्रियता दिखा रहे हैं उतना ही किसान भी इससे दूरी बनाकर चल रहे हैं। वर्ष 2013-14 में जुलाई माह में किसानों से आवेदन मंगाये गये थे। सोचनीय पहलू यह है कि पूरे शहडोल संभाग से एक भी आवेदन विभाग तक नही पहुंचे थे। अब जब लगभग पांच वर्ष बीतने को है तब भी योजना को लेकर किसानों में कोई विशेष जागरूकता व ललक जागृत नही हो पाई है। योजना का लाभ पाने के लिये कोई भी किसान रुचि नही ले रहा है।

क्या थी योजना ?
मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन योजना के अंतर्गत जिले के किसानों को तकनीकों के प्रत्यक्ष अवलोकन एवं प्रायोगिक जानकारी के लिये विदेश भ्रमण के लिये भेजा जाना था। जिसमें किसानों को कृषि, उद्यानिकी, खाद्य प्रशंस्करण, पशु पालन, डेयरी विकास के साथ ही अन्य क्षेत्रों की आधुनिक तकनीक की जानकारी प्रदान करनी थी। इसके लिये किसानों को शासन स्तर पर अनुदान दिया जाना था। जिसमें अजजा वर्ग के
किसानों को कुल व्यय का 90 प्रतिशत, अजा वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत व सामान्य व अन्य कृषकों को शासन स्तर पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। दु:खद पहलू यह है इस योजना का लाभ लेने में किसानों को पासपोर्ट सबसे ज्यादा आड़े आ रहा है। इतना ही नही कई किसान ऐसे भी है जिन्हे इसके विषय मे अभी तक विस्तृत जानकारी भी नही मिल पाई है।

दो वर्ष से नहीं लिये जा रहे आवेदन
योजना के तहत लगभग दो वर्ष से आवेदन ही नही लिये जा रहे है। जिसकी वजह पहले से ही आवेदन कर्ताओं को विदेश यात्रा का अवसर न मिलने को बताया जा रहा है। वास्तविकता क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चल पायेगा। सूत्रों की माने तो प्रदेश स्तर पर भले ही आवेदनों की भरमार हो लेकिन जिले की स्थिति इससे परे है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर में पहले से लंबी कतार लगी हुई है और पहले से आवेदन कर्ता विदेश यात्रा पर नही जा पाये हैं।

इनका कहना है
कृषि विकास विभाग के उप संचालक जेएस पेन्द्राम ने कहा दो वर्ष से न तो कोई लक्ष्य दिया गया और न ही आवेदन लिये जा रहे है। जिन किसानों द्वारा पहले आवेदन किया गया है उन्हें भेजने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद ही आगे का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।


Reference: https://www.patrika.com/shahdol-news/chief-minister-farmers-foreign-studies-tour-1931779/

 

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