जिले में 1180 हैंडपंप बंद, 5 नल-जल योजनाओं ने भी साथ छोड़ा, लोगों को खरीदना पड़ रहा पानी

गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में जलसंकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर दिन-ब दिन-गिर रहा है और जल स्त्रोत सूखते जा रहे हैं। इसके चलते जिले के 1180 हैंडपंप साथ छोड़ चुके हैं। जबकि 5 नल-जल योजनाएं पूरी तरह बंद हो चुकी है। वहीं कुछ जगह भूजल स्तर गिरने की वजह से भी दिक्कतें आ रही है। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए खासी मशक्कत करना पड़ रही है।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की बसाहटों में पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए छोटी-बड़ी 128 योजनाएं संचालित की जा रही है। पीएचई के अधिकारी के मुताबिक मई के दूसरे पखवाड़े तक 5 नल-जल योजनाएं बंद हो चुकी है। हालांकि यह तो सिर्फ विभागीय आंकड़े हैं स्थिति इससे ज्यादा गंभीर है। अब इनसे जुड़े ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उधर, गांवों में योजना के संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायतों का है। गांवों में समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है। लोग पानी खरीदने को भी मजबूर है।

दिनोंदिन बढ़ रही परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्त्रोत ही हैंडपंप है। गर्मी बढ़ने के साथ ही कहीं भूजल स्तर में गिरावट तो कहीं अन्य कारणों से अभी तक जिले के 1180 हैंडपंप बंद हो चुके हैं। मई के दूसरे पखवाड़े में बने हालात से लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

पिटोल : डेढ़ महीने में दो दिन जलप्रदाय, 40 रु. प्रति ड्रम मिल रहा पानी वो भी रात को

पिछले 15 सालों से पेयजल की समस्या के कारण सुर्खियों में रहने वाले ग्राम पिटोल में इस बार भी भीषण संकट खड़ा हो गया है। लोगों को पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही है। पिछले डेढ़ महीने में पंचायत द्वारा केवल दो दिन जलप्रदाय किया गया है। 40 रु. प्रति ड्रम की दर से पानी खरीदना पड़ रहा है वो भी रात को। आर्थिक रूप से सक्षम ग्रामीण तो पैसे देकर पानी भरा लेते है लेकिन गरीब तबके के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा नलजल योजना सुचारू रूप से नहीं चला पाने के कारण पिटोल की गृहिणियों में पंचायत के खिलाफ काफी गुस्सा है। गृहिणी कौशल्या नागर, बोरकी बेन प्रजापत, सुनीता राठौड़, रानू नागर, साधना शाह, गंगा सोनी, शांति अरोड़ा, यशोदा मोदी आदि ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में केवल दो बार जल प्रदाय पंचायत द्वारा किया गया और पंचायत कर्मियों से पूछने पर उन्हें एक ही जवाब मिलता है-मोटर जल गई। पानी के लिए अब तो पिटोल पूरी तरह टैंकरों पर आश्रित हो चुका है। इसके कारण गृहिणियों को रात की 11 बजे तक पानी के टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। गृहिणियाें ने पंचायत के खिलाफ रोड पर उतरने की चेतावनी दी है। लगभग पांच हजार की आबादी वाले इस ग्राम में 10 निजी पानी के टैंकर ग्रामीणों की प्यास 40 रुपए ड्रम लेकर मिटा रहे हैं और पंचायत की उदासीनता के चलते अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।

कुंदनपुर : विकासखंड में एकमात्र हैंडपंप चालू, वहां भी लगी रहती है बर्तनों की लाइन

राणापुर विकासखंड के ग्राम कुंदनपुर में पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। नल-जल योजना का संचालन ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है। करीब तीन वर्ष पूर्व नाहरपुरा में भामची नदी बांध की परियोजना सिंचाई के लिए आई थी जो गांव वालों और जन प्रतिनिधियों के विरोध स्वरूप वापस चली गई। अगर योजना पर काम होता हो क्षेत्र के कुओं और हैंडपंप का जल स्तर बढ़ जाता। वर्तमान में गांव में 10 हैंडपंप बंद पड़े हैं। एक हैंडपंप चालू है जहां भीड़ लगी रहती है। दिनभर लोग पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। पास ही एक कुआं है जिसकी हालत जर्जर हो गई है। कुएं का पानी करीब 25 फीट नीचे चला गया है। हालत यह है कि समीप के गुजरात राज्य के गांव कठला से पीने का पानी आ रहा है। ग्रामीण 20 रुपए में 20 लीटर पानी खरीद रहे हैं। संपन्न परिवार को पानी खरीद लेते हैं लेकिन गरीबों के आगे संकट बना हुआ है।

कुंदनपुर क्षेत्र के 10 हैंडपंपों में से मात्र एक चालू है जिसमें लाइन लगी रहती है।

छह महीने में फिल्टर पानी का दावा : पिटोल के ग्रामीणों द्वारा कई बार सांसद कांतिलाल भूरिया से फिल्टर पानी की मांग की गई। उनके द्वारा आश्वासन दिया गया लेकिन पानी नहीं मिला। विधायक शांतिलाल बिलवाल ने 2 अप्रैल को पिटोल के लिए 88 लाख की नलजल योजना का भूमिपूजन कर 6 महीनों के भीतर ग्रामीणों को फिल्टर पानी देने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक तो इस योजना पर कोई काम शुरू हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।

रात को पानी के लिए मशक्कत

कहां कितने हैंडपंप बंद

विकासखंड बंद कुल

झाबुआ 180 2509

रामा 205 2148

पेटलावद 230 1835

राणापुर 190 2027

थांदला 185 2095

मेघनगर 190 2610

कुल 1180 13224

जहां भी नल-जल योजना बंद है वहां वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। अभी तक पांच नल-जल योजना बंद हो चुकी है। जल स्तर गिरने की वजह से कई हैंडपंप बंद हुए हैं। जितेंद्र मावी, ईई, पीएचई


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/jhabua/news/latest-jhabua-news-030004-1721871.html

Image Courtesy: Same As Above

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