एक हजार दिन में भी सीएम हेल्पलाइन पर नहीं हो रहा निराकरण

शिक्षा विभाग की सबसे अधिक लंबित हैं शिकायतें

दमोह. विधानसभा चुनाव करीब है तीन माह बाद आचार संहिता लगने वाली है, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई योजनाओं का लाभ अब तक नहीं मिल पा रहा है। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन भी अधिकारियों की धींगा मस्ती से फ्लाफ शो साबित हो रही है। दमोह जिले में सीएम हेल्पलाइन पर कई शिकायतें ऐसी हैं, जिनका निराकरण एक हजार से अधिक दिन में भी नहीं हो पाया है।
सीएम हेल्पलाइन पर की जाने वाली शिकायतों के संबंध में भले ही अधिकारी यह दावा करते हों कि उनके यहां 300 दिन से अधिक की शिकायतें लंबित नहीं हैं, लेकिन सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में ऐसी अमूमन हर विभाग की शिकायतें हैं जो एक हजार दिन से अधिक समय से लंबित पड़ी हुईं निराकरण के लिए अपेक्षित दिख रही हैं। इन शिकायतों में सर्वाधिक मामले उन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिनकी वेतना, एरियर व अन्य विसंगतियों के अलावा पेंशन प्रकरणों से संबंधित हैं।
यहां दिलचस्प तथ्य यह है कि जब सरकारी कर्मचारियों की शिकायतें ही सीएम हेल्पलाइन पर निराकृत नहीं हो पा रही हैं, तो आमजनों की क्या विसात है। हमने पड़ताल की तो सामने आया कि सैंकड़ों शिकायतें एक हजार दिन से अधिक समय से लंबित हैं।
1109 दिन से लंबित है
जबेरा ब्लॉक के शिकायतकर्ता श्याम सुंदर कुमार ने 6 मई 2015 को शिकायत दर्ज कराई थी कि शासकीय प्राथमिक शाला जबेरा संकुल केंद्र शासकीय कन्या उच्तर माध्यमिक शाला जबेरा स्कूल शिक्षा विभाग में हैडमास्टर के पद पर कार्यरत थे। 28 फरवरी 2015 को सेवानिवृत हुए थे। विभाग द्वारा जीपीएफ की राशि नहीं दी गई है। इस दौरान निचले स्तर के निराकरण पर शिकायतकर्ता द्वारा असंतुष्टी दर्शाई गई। इसके बाद 1109 दिन से इनकी शिकायत लंबित चली आ रही है।
1266 दिन से लंबित
महिला सशक्तिकरण विभाग में पदस्थ रहे बाबूलाल महोबिया के पुत्र विनोद महोबिया ने 30 नवंबर 2014 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी कि इनके पिता बाबूलाल महोबिया जिला महिला बाल विकास कार्यालय दमोह में भृत्य के पद पर कार्यरत थे। जिन्हें 2 फरवरी 2005 से 2 सितंबर 2005 का वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा एरियर्स का भुगतान नहीं किया गया है। आवेदन मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड भोपाल में किया था, क्योंकि इनका वेतन मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड भोपाल से होना है। शिकायत की स्थिति व निराकरण के लिए एल फोर अधिकारी तक शिकायत दी गई है, लेकिन 1266 दिन में इस शिकायत का निराकरण नहीं हो पाया है।
1241 दिन से लंबित
तेंदूखेड़ा निवासी राकेश खरे ने 25 दिसंबर 2014 को शिकायत की थी कि उसके पिता गणेश प्रसद खरे की मृत्यु 10 सितंबर 2012 हो गई थी। वे शासकीय प्राथमिक शाला दरोली में वर्ग 3 में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। इनका पेंशन, पीएफ कटती थी, जिसके लिए नॉमीनेशन उनकी पत्नी किरण खरे को रखा गया था। उनके द्वरा इस संबंध में आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को 11 मार्च 2014 को दिया गया, लेकिन आज दिनांक तक उनको राशि नहीं मिल है। वहीं सीएम हेल्पलाइन में एलफोर अधिकारी स्तर पर 1241 दिन बाद भी विवरण अपेक्षित किया जा रहा है
1146 दिन से लंबित
लोक शिक्षण से संबंधित एक शिकायत दमोह निवासी मिथलेश कुमार सनदिल ने 30 मार्च 2015 को की थी। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि राज्य शिक्षा विभाग में लिपिक संवर्ग की पदोन्नति 2000, 2003 व 2006 दमोह में हुई थी। जो की फर्जी तरीके से की गई थी। जिसकी जांच संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग के द्वारा की गई जिसमे तथ्य सही पाए गए हैं, लेकिन दिनांक तक पदोन्नति निरस्त करने और वसूली करने के आदेश नहीं दिए गए हैं। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की स्थिति व निराकरण अधिकारी के निराकरण को अमान्य कर दिया, जिससे इस शिकायत का निराकरण 1146 दिन से लंबित चला आ रहा है।
1125 दिन से लंबित
हिंडोरिया निवासी उमाशंकर धनगर ने 27 अप्रैल 2015 को शिकायत दर्ज कराई थी कि गुंजी संकुल केंद्र के शासकीय बालक उच्तर माध्यमिक विद्यालय हिंडोरिया में पदस्थ है। उसे 1986 से एरियर्स नहीं दिया गया है, जल्द से जल्द भुगतान किया जाए। साथ ही 1995 से भी लंबित हैं। 2010 के मेडिकल बिल के 23 हजार 251 रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता पांच बार आवेदन कर चुका, लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ है। यह शिकायत भी 1125 दिन से एल फोर अधिकारी स्तर पर लंबित दिख रही है।
वर्जन
मेरे विभाग में 300 दिन से अधिक शिकायतें लंबित नहीं हैं, यदि आप बता रहे हैं कि एक हजार दिन से अधिक की शिकायतें लंबित हैं, जो मैं इनका शीघ्र निराकरण कराने का प्रयास करुंगा।
पीपी सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी दमोह।


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