क्या हुआ तेरा वादा, नर्मदा मैइया मांगे जवाब

May 1, 2018, 7:31 pm

भोपाल। मप्र सरकार ने पिछले साल जोर-शोर के साथ नर्मदा सेवा यात्रा की थी। करीब 5 महीने की इस यात्रा में दर्जनों वादे सीएम शिवराज सिंह ने किए। यात्रा के एक साल पूरे होने जा रहे हैं। तो इस मौके पर हमने सीएम के 10 बड़े वादों की पड़ताल की, 16 जिलों के 50 से ज्यादा नर्मदा घाटों की हमने खाक छानी। इस महापड़ताल से जो निकलकर सामने आया, उसे हम जस के तस आपके सामने पेश करने वाले हैं। मंगलवार शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक इस मैराथन स्पेशल शो का प्रसारण ibc24.in/livetv पर लाइव किया जा रहा है।

देखें –

वादों की बुलंद बस्तियां लेकर हम क्या करेंगे, हमें हमारी जमीं दे दो, हम आसमां लेकर क्या करेंगे ? नर्मदा के ये खामोश किनारे, यही कह रहे हैं कि लोकतंत्र में वादों की रेवड़ी तो मिल जाती है, पर बदलाव की जमीन बमुश्किल मिल पाती है। नर्मदा यात्रा का एक साल 15 मई को पूरा हो रहा है। इस मौके पर सवाल भी हैं, और पड़ताल के लिए भरपूर स्पेस भी है, मौका भी है और दस्तूर भी, क्योंकि जिस नर्मदा सेवा यात्रा के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पूरे शासन तंत्र को झोंक दिया था, जिसमें तमाम सेलिब्रिटीज का फेरा लगता रहा। जिसका समापन देश के प्रधानमंत्री के हाथों हुआ। जिसे नर्मदा बचाने का सबसे बड़ा आयोजन करार दिया गया। उस यात्रा के वादे जमीन पर उतर पाए या नहीं, ये जानने का यही सही वक्त है। तो सच की मशाल थामे के लिए आईबीसी24 फिर निकला एक महापड़ताल के लिए, हमारे रिपोर्टर भरी गर्मी में घूमते रहे घाट-घाट, हमने 16 जिलों में फैले 50 से ज्यादा घाटों की खाक छानी, हमने जो देखा, जो सुना, जो समझा, वो हैरान कर देने वाला है। क्योंकि न घाट साफ हुए, न नदी साफ हुई, और न जमीनी हालात बदले।

देखें –

हद ये कि नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कलयुग का भागीरथ बताया गया, पर आज भी नर्मदा मैली है। वादा था, नर्मदा में एक बूंद भी गंदा पानी ना मिलने देने का लेकिन छोटे नालों का गंदा पानी आज भी नर्मदा में सीधे मिल रहा है। नर्मदा यात्रा के नाम पर सियासी राग-रंग खूब दिखा, शोर-शराबा भी जमकर हुआ, बड़े वादे हुए, ऊंचे इरादों के इश्तेहार दिखे, लच्छेदार स्पीच, भावुक टिप्पणियां, यानी एक्शन, इमोशन सब कुछ, पर अफसोस, ये सिर्फ बातें थीं, और कुछ नहीं।

देखें –

नर्मदा, को मां कहने वालों ने उसे सियासत की नदी बना दिया मध्यप्रदेश नार्मदेय संस्कृति की धुरी है। जहां श्रद्धा से कहीं ज्यादा सभ्यता का आधार है नर्मदा, वहीं आज सिसक रही हैं नर्मदा, गुहार लगा रही हैं नर्मदा, ऐसे में आईबीसी24 ने सच दिखाने का बीड़ा उठाया है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि नर्मदे सेवा यात्रा का समापन हुआ उद्गम स्थल अमरकंटक में हुआ। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर मौजूद रहे। महीनों चली ये यात्रा सियासत की ओर ज्यादा झुकी रही और सरोकारों की तरफ कम।

देखें –

नर्मदा सेवा यात्रा, 11 दिसंबर 2016 को अमरकंटक से शुरू हुई और 15 मई 2017 को यहीं इसका समापन हुआ। 148 दिनों तक यानी करीब 5 महीने तक नर्मदा सेवा यात्रा चलती रही, इस दौरान मप्र के 1000 से ज्यादा गांवों से होकर ये यात्रा गुजरी और करीब साढ़े 3000 किमी का सफर तय किया।राज्य सरकार की इस बेहद महात्वाकांक्षी मुहिम के लिए शिवराज सरकार ने बहुत सा पैसा, वक्त और ऊर्जा खर्च की। करीब 5 महीनों के दौरान करीब 50 पड़ाव ऐसे थे, जहां खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहे। यही नहीं इस दौरान 570 से ज्यादा बड़ी हस्तियां भी इस यात्रा में शामिल हुईं, जिनमें मंत्री, सांसद, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, इंटरनेशनल लीडर्स, संत और बॉलीवुड एक्टर्स भी शामिल थे। नर्मदा सेवा यात्रा को लेकर विपक्ष ने आरोपों और सवालों की झड़ी भी खूब लगाई। विपक्ष ने इसे मुख्यमंत्री की सेल्फ मार्केटिंग तक करार दिया।

 

फिल्मी सितारों और ग्लैमर की दुनिया से जुड़ी हस्तियों को यात्रा से जोड़ने का विरोध भी विपक्षी नेताओं ने किया। विरोधी नेताओं ने नर्मदा यात्रा में हुए खर्च पर भी सवाल उठाए। नर्मदा सेवा यात्रा नदी के किनारे बसे 16 जिलों की करीब 96 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी। इसलिए इसका एक सियासी मतलब भी निकाला गया, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले सीएम ने एक ऐसे क्षेत्र की यात्रा की, जहां नर्मदा आस्था की सबसे बड़ी केंद्र है। यात्रा शुरू होने से पहले विपक्ष ने इसे पॉलिटिकल गिमिक करार दिया था, आज एक साल बाद ये लगता है, कि विपक्ष के इस आरोप में कुछ तो सच्चाई जरूर थी।

 

वेब डेस्क, IBC24


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *