अन्य के टिकट पर कर रहे ‘तीर्थ दर्शन’

डीबी स्टार

Bhaskar News Network | Last Modified – Jul 27, 2018, 02:25 AM IST

डीबी स्टार भोपाल/इंदौर

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का दुरुपयोग हो रहा है। असल आवेदकों के टिकट पर फर्जी यात्री तीर्थदर्शन का फायदा उठा रहे हैं। इंदौर-पंढरपुर यात्रा में यह खुलासा हुआ है। डीबी स्टार की पड़ताल में कई यात्री ऐसे निकले, जिन्होंने दूसरे के टिकट पर यात्रा का मजा लिया। तीर्थदर्शन योजना के तहत इंदौर से पंढरपुर के लिए 22 जुलाई को ट्रेन रवाना हुई है। इसमें 459 यात्रियों का जत्था है। ट्रेन 26 जुलाई की शाम वापस इंदौर पहुंची। इसी यात्रा के टिकटों के वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।

140 यात्रियों में से 60 फर्जी

ट्रेन के एक कोच में 70 सीटें होती हैं। डीबी स्टार की पड़ताल के मुताबिक एस-4 और एस-10 कोच मिलाकर करीब 60 यात्री ऐसे थे, जिन्होंने दूसरे के टिकट पर यात्रा की। यानी करीब आधे यात्रियों ने फर्जी टिकट पर यात्रा का लुत्फ उठाया। जानकारी के मुताबिक हर यात्रा में लगभग 400 यात्री जाते हैं। यदि हर कोच में इस तरह फर्जीवाड़ा मानें तो टिकटों की धांधली का आंकड़ा कितना बड़ा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

सीनियर सिटीजन के लिए मुख्यमंत्री ने तीर्थ दर्शन योजना शुरू की है। टिकट बनता किसी और के नाम से है, जबकि यात्रा कोई और करता है। काफी समय से यह गड़बड़ी चल रही है। डीबी स्टार ने 22 जुलाई को इंदौर से पंढरपुर के लिए रवाना हुई यात्रा पर नजर रखी। इसमें पता चला कि 60 लोग फर्जी तौर पर यात्रा में शामिल हुए हैं।

Expose

मोबाइल नंबर भी नेताओं के

तीर्थदर्शन योजना के टिकट की जानकारी आवेदक से पहले नेताओं को मिले, इसलिए आवेदन पर आवेदक की जगह कार्यकर्ता अपने मोबाइल नंबर लिखवाते हैं। डीबी स्टार ने जब यात्रियों की हकीकत जानने के लिए यात्रियों के नंबर पर फोन लगाया तो कई नंबरों पर पार्षदों के कार्यकर्ताओं ने बात की। इस कारण आवेदक को हकीकत पता नहीं चल पाती।

आवेदकों के साथ छलावा

तीर्थदर्शन योजना के नियमों के तहत वही व्यक्ति यात्रा कर सकता है, जिसकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो। यात्रा का मौका एक ही बार मिलता है। टिकट वितरण में धांधली से ऐसे आवेदक छले जा रहे हैं, जिनके टिकट पर दूसरे ने यात्रा कर ली है, कम्प्यूटर की नजर में वे यात्रा कर चुके हैं। यानी ऐसे लोग यात्रा का फायदा उठाए बिना ही अपात्र घोषित हो जाएंगे। कुछ ऐसे भी हैं, जो दो-दो बार यात्रा कर चुके हैं।

रेलवे के स्तर पर जांच नहीं

तीर्थदर्शन यात्रा में ट्रेन में राजस्व विभाग के अनुरक्षक और जीआरपी के जवान जाते हैं। उन्हीं पर यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी होती है। ट्रेन में रेलवे की तरफ से टीटीई या टीसी नहीं रहते हैं। नेता इसी का फायदा उठाते हैं। अनुरक्षक और जवानों पर रौब बताकर वे मनमानी करते हैं। इंदौर से गई यात्राओं में जवानों से मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं।

फर्जीवाड़े की जांच कराएगी सरकार

 मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में वही व्यक्ति यात्रा कर सकता है, जिसके नाम पर टिकट है। दूसरा व्यक्ति इसके लिए पात्र नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा है? अगर ऐसी शिकायतें हैं तो आप मुझे दस्तावेज भेजिए, हम जांच कराएंगे। मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग

सीधी बात  नरेंद्र शर्मा, उपायुक्त, नगर निगम इंदौर

रेलवे से चेकिंग के लिए कहेंगे

तीर्थदर्शन ट्रेन इंदौर-पंढरपुर में कई यात्री दूसरों के टिकट पर यात्रा कर रहे हैं?

यह धोखाधड़ी है। जिसका टिकट है, वही यात्रा कर सकता है।

पंढरपुर ट्रेन में तो कई यात्रियों ने फर्जी टिकट पर यात्रा की?

रेलवे के अफसरों को जांच करना चाहिए। यह गलत है।

ट्रेन में रेलवे के टीटी नहीं होते हैं?

कलेक्टर ऑफिस के कर्मचारी जाते हैं।

आवेदक को ही टिकट मिलता है या नेताओं को?

हम आवेदक का नाम देखकर उसे ही टिकट देते हैं।

यह गड़बड़ी कैसे रोकेंगे?

रेलवे से टिकट चेकिंग को कहेंगे। अगली बार ऐसा न हो, इसलिए मामले की जांच करेंगे।

जांच-पड़ताल हो गई बेमानी

तीर्थदर्शन योजना में आवेदकों से ऑफलाइन फॉर्म भराए जाते हैं। साथ ही समग्र आईडी, बीपीएल राशन कार्ड और आधार कार्ड जमा कराया जाता है। फिर ये आवेदन कम्प्यूटर में चढ़ाए जाते हैं। एनआईसी का सॉफ्टवेयर आवेदनों का चयन करता है। कम्प्यूटर से निकली आवेदकों की सूची आईआरसीटीसी को भेजी जाती है। वहां से टिकट जनरेट होते हैं। टिकटों का फर्जीवाड़ा बताता है कि प्रशासन की जांच-पड़ताल और प्रक्रिया बेमानी है, क्योंकि मूल टिकटों के साथ वे आवेदक यात्रा ही नहीं कर रहे हैं, जिन्हें इसका अधिकार मिला है।


Reference: https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/latest-bhopal-news-022537-2300530.html

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