सालभर में दस लाख का घाटा, संकट में आई ‘मामा की थाली

hemant jat | Publish: Apr, 10 2018 02:11:30 PM (IST)                                                   Khargone, Madhya Pradesh, India

खरगोन.
गरीबों को पांच रुपए में भरपेट खाना देने के लिए सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय रसोई शुरु की। शहर के बस स्टैंड कॉम्प्लेक्स स्थित रसोई में बीते साल 7 अप्रैल को प्रकाश स्मृति सेवा संस्थान के माध्यम से गरीबों को पांच रुपए में खाना खिलाया जा रहा है। सालभर में करीब 1 लाख 10 हजार से अधिक लोगों ने रसोई में पहुंचकर योजना का लाभ लिया। इसके बाद संस्थान ने भी रसोई संचालन से हाथ खींच लिए है। नपा ने रसोई संचालन के लिए 16 मार्च को विज्ञप्ति निकाली, लेकिन एक भी आवेदन नहीं आया। इसके बाद नपा ने सस्ती दर पर अनाज के साथ ही संचालक संस्था को 3 लाख 50 हजार रुपए अनुदान भी देने का निर्णय लिया। इसके लिए इच्छुक संस्थाओं को 6 अप्रैल तक आवेदन करना था। नपा के स्वास्थ्य अधिकारी प्रकाश चिते ने बताया कि एक संस्थान ने इसके लिए आवेदन दिया है। हालांकि अब तक उनके पत्र को देखा नहीं है। शर्त के अनुरुप होने पर काम सौंपा जाएगा। प्रकाश स्मृति संस्थान के प्रबंधक विक्रमसिंह चौहान ने बताया कि सालभर में ईंधन, किराना और रसोई में कार्यरत मजदूरों के वेतन में ही करीब 8 लाख से अधिक का खर्च हुआ। नपा ने भवन-बर्तन और पानी के अलावा एक रुपए किलो की दर पर गेहूं-चावल उपलब्ध कराएं। अनाज के परिवहन, बिनाई और पिसाई के बाद आटा तैयार करने में प्रति किलो के हिसाब से करीब 4 रुपए खर्च हुआ।

ऐसा रहा रसोई का गणित
रसोई में सालभर में करीब 1 लाख 10 हजार लोगों ने भोजन किया। इस पर करीब 15 लाख रुपए खर्च हुए। टोकन और दान के रुप में करीब 5 लाख रुपए अनुदान मिला। योजना के तहत गैस सिलेंडर में करीब 2.75 लाख रुपए और मजदूरों के वेतन में 4 लाख रुपए खर्च हुए।

सेवा कार्य के लिए घरेलू सिलेंडर नहीं दिला सकें
सरकार ने रसोई को गरीबों की सेवा का माध्यम बताया, लेकिन इस सेवा प्रकल्प के लिए सरकार सस्ती रसोई तक नहीं दिला सकी। प्रबंधक चौहान ने बताया कि रसोई में कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग करना पड़ा। संस्था को सालभर में महज ईंधन पर ही 2 लाख 75 हजार रुपए खर्च करना पड़ा।

रोटी बनाने की मशीन भी नहीं मिली
योजना शुभारंभ के समय ही अफसरों ने रसोई के लिए रोटी मेकर मशीन खरीदने की घोषणा की, लेकिन सालभर में नपा यह मशीन नहीं खरीद पाई। अफसर महज टेंडर प्रक्रिया की बात कहकर मामले को टालते रहे। जानकारी के अनुसार मशीन मिलने से संस्थान को कम मजदूरों की जरूरत लगती। इससे पैसों की बचत हो सकती थी।
फैक्ट फाइल
– 1 लाख 10 हजार ने सालभर में किया भोजन
– 15 लाख रुपए करीब सालभर की लागत
– 5 लाख रुपए के करीब टोकन-दान से मिले
– 10 लाख से अधिक का नुकसान

नपा चलाएगी
रसोई के संचालन के लिए एक संस्थान का आवेदन मिला है। नियम-शर्त के अनुरुप होने पर काम सौंपेंगे। अन्यथा नगरपालिका खुद इसका संचालन करेगी।

प्रकाश चिते, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा खरगोन।

खटाई में पड़ी दीनदायल अंत्योदय रसोई योजना


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