पंडित नहीं, अब भूमका निभाएंगे आदिवासियों की शादी

“बैतूल. मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में आदिवासी समुदाय के लोगों का विवाह अब पंडित द्वारा सम्पन्न नहीं कराए जाएगें। आदिवासी समुदाय द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन में पंडितों द्वारा विवाह सम्पन्न कराए जाने पर आपत्ति जताते हुए भूमकाओं से विवाह कराने की मांग थी, जिस पर सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा आदिवासियों के विवाह सामाजिक रीति रिवाज से आयोजित कराने का आदेश जारी किए है। सामूहिक विवाह सम्मेलन में आदिवासी संस्कृति से कराया जाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर शशंक मिश्र द्वारा १६ मार्च २०१८ को आदेश जारी किया है, जिसमें, मुख्यमंत्री विवाह योजना अंतर्गत आदिवासी जोड़ों का विवाह आदिवासी संस्कृति से कराने के लिए भूमका, लगन्या, पडि़हार को आदिवासी संस्कृति से विवाह सम्पन्न कराने की बात कही गई है। विवाह में आदिवासियों को पशु क्रूरता अधिनियम का करना होगा पालन। आयोजन के दौरान भारतीय वन जीव संरक्षण अधिनियम की १९७२ एवं पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम १९६० में वर्णित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना है।

अप्रैल माह में होना है विवाह सम्मेलन का आयोजनजन

प्रतिनिधियों एवं आदिवासी समाज सेवा संगठन की ओर सरकार से मांग की थी कि उक्त सामूहिक विवाहों में आदिवासी जोड़ों का विवाह आदिवासी सांस्कृतिक से ही संपन्न कराए जाए। आदिवासी समुदाय के सदस्यों का कहना था कि कन्यादान विवाह सम्मेलन में आदिवासियों आदिवासी संस्कृति से हो जिससे की आदिवासी अधिक से अधिक संख्या में सम्मेलन से विवाह कर सके। अप्रैल माह में जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाना है, जिसमें भूमकाओं द्वारा विवाह सम्पन्न कराए जाना है।

१४ अप्रैल तक नहीं बजेंगी शहनाई

खरमास चालू होने के कारण वैवाहिक समारोहों पर ब्रेक लग गया है। यह ब्रेक 14 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान कहीं भी शहनाई कीआवाज नहीं सुनाई देगी। खरमास के दौरान शुभ कार्यों पर पाबंदी रहती है इसी वजह से वैवाहिक कार्यक्रम बंद हो गए हैं। पं. जयनारायण तिवारी के अनुसार जब भी सूर्यदेव बृहस्पति की मीन राशि में गोचर करते हैं तो खरमास शुरू होता है। इस दौरान मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं। खरमास चूंकि 14 मार्च से प्रारंभ माना गया है इसलिए 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। 15 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होगा और खरमास की समाप्ति होगी। अक्षय तृतीय के बाद से कई विवाह मुहुत रहेंगे।अक्षय तृतीय पर भी होंगे विवाह कार्यक्रम१८ अप्रैल से अक्षय तृतीया से पुन: शुभ कार्य की शुरूआत की जाएगी, एवं ११ जुलाई तक ३६ दिन मांगलिक कार्य व शादी-विवाह के लिए शुभ व फलदायी मुहुर्त रहेगें। पं. सोमेश परसाई के अनुसार वैसे तो अभी 14 मार्च को सूर्य के मीन राशि में चले जाने से मलमास (खर मास) लग जाएगा जो १४ अप्रैल को पूरा होगा। पूरे मार्च के महीने में मांगलिक, वैवाहिक व शुभ कार्य नही हो सकेंगे।”


Reference: https://www.patrika.com/betul-news/mukhyamantree-kanyaadaan-vivaah-yojana-1-2535801/

 

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